नफरत के अंधेरे को दीपक ने अपनी रोशनी से किया मिटाने का काम-पेश की इंसानियत की सच्ची मिसाल
नफरत के अंधेरे को दीपक ने अपनी रोशनी से किया मिटाने का काम-पेश की इंसानियत की सच्ची मिसाल

उत्तराखंड के कोटद्वार में पिछले कुछ दिनों से काफी चर्चा देखने को मिल रही है और अब यह मामला पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है
लेकिन कुछ लोगों की बिना वजह की बेबुनियाद बातें समाज में सौहार्द बिगाड़ने का कार्य कर देती है,
हालांकि हम यही चाहते हैं कि किसी भी समाज के लोगों की धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करना चाहिए और मर्यादा का ध्यान रखते हुए अपना कार्य किया जाना चाहिए
लेकिन 26 जनवरी को एक दुकान पर कुछ युवक आते हैं जो बजरंग दल से जुड़ा होना बताते हैं, और दुकान पर बैठे लगभग 70 वर्षीय बुजुर्ग को कहते हैं की दुकान का नाम जो बाबा स्कूल ड्रेस के नाम से है उसको बदलकर कुछ और करो
जबकि हमारा मानना है कि उसमें शायद कोई ऐसा शब्द नहीं था जिससे कोई धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हो क्योंकि दुकान पर लगे बोर्ड पर उन्होंने प्रोपराइटर में अपना पूरा नाम भी लिख रखा है जिसमें छुपाने जैसी बात कोई नहीं आती है कि वह कौन है जबकि उन्होंने कोई अपना हुलिया भी चेंज नहीं कर रखा था, पिछले कई सालों से ऐसे ही काम करते आ रहे थे, लेकिन एक दिन अचानक कुछ युवकों द्वारा आकर कहा जाता है कि अपनी दुकान का नाम चेंज करो तो शायद यह सही नहीं है, यदि वह हिंदू देवी देवता या हिंदू नाम पर बोर्ड लगाते और अपनी पहचान छुपाते तो जरूर उनको सवाल किया जा सकता था लेकिन क्या बाबा शब्द ऐसा है कि वह किसी धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाता हो, यह सिर्फ माहौल बिगड़ने की साजिश है और कुछ नहीं जिस तरह से दीपक कुमार ने एक अच्छे इंसान होने का परिचय देते हुए अपने दोस्त विजय रावत के साथ समाज को तोड़ने वाले और धार्मिक उन्माद फैलाने वाले लोगों का डटकर मुकाबला किया उसको सभी धर्म के लोग दीपक और उसके मित्र विजय रावत को शाबाशी दे रहे हैं कि उन्होंने कैसे माहौल को खराब होने से बचाया
अब कुछ लोग बाद में इकट्ठा होकर की मां को टारगेट करते हुए गाली देते हैं तो क्या वे लोग समाज के अच्छे लोग कहलाए जाएंगे, पुलिस प्रशासन को भी ऐसे लोगों पर कार्यवाही करनी चाहिए जो संगठन और धर्म को बदनाम करते हुए हुड़दंग बाजी करते हैं और समाज को तोड़ने का कार्य करते हैं
हम इतना ही कहना चाहेंगे चाहे वह हिंदू धर्म हो मुस्लिम धर्म हो या सिख धर्म हो या इसाई धर्म हो यदि उसे समाज के लोग लोगों की धार्मिक भावनाओं या मानसिक भावनाओं का उत्पीड़न करते हैं तो उनका समाज उनके साथ न देकर उनका विरोध करें, ताकि सभी सौहार्दपूर्ण माहौल में बिना तनाव के रह सके, और सरकार भी बेवजह धार्मिक उन्माद फैलाने वाली नकारात्मक ताकतों का पतन करें और जनता के लिए एक बेहतर तनाव मुक्त, भय मुक्त माहौल देने का काम करें
और देश विरोधी जो भी लोग हैं वह किसी भी धर्म समुदाय के हो उन पर कार्यवाही सुनिश्चित करें, तभी समाज एकजुट होकर आगे बढ़ेगा
जय श्री राम , जय हिंद
भारत माता की जय
अमरदीप वर्मा
मुख्य संपादक
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