

दो वार्डों में कैट आई सोलर, फैंसी लाइट, थर्मोप्लास्टिक रोड लाइन और सौंदर्यीकरण के एक जैसे एस्टीमेट कैसे तैयार हुए? अवर अभियंता की भूमिका भी सवालों के घेरे में, निविदाएं निरस्त करने और भुगतान रोकने की मांग
मुजफ्फरनगर – नगर पालिका परिषद मुजफ्फरनगर में विकास कार्यों के नाम पर तैयार किए जा रहे एस्टीमेट और निविदा प्रक्रिया को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। भाजपा सभासद एवं वार्ड-26 के सभासद देवेश कौशिक ने वार्ड-25 के सभासद राजीव शर्मा और वार्ड-49 के सभासद मनोज वर्मा से जुड़े विकास कार्यों के प्रस्तावों पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए वित्तीय अनियमितताओं, कथित मिलीभगत और भ्रष्टाचार की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनकी शिकायत ने नगर पालिका के निर्माण और पथ प्रकाश विभाग की कार्यप्रणाली को भी सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
देवेश कौशिक ने 31 अक्टूबर 2026 को अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद को शिकायती पत्र भेजकर आरोप लगाया है कि दोनों वार्डों की भौगोलिक परिस्थितियां अलग-अलग होने के बावजूद विकास कार्यों के एस्टीमेट लगभग एक जैसे तैयार कराए गए हैं। शिकायत में दोनों सभासदों और संबंधित अवर अभियंता के बीच कथित साठगांठ का आरोप लगाते हुए सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका जताई गई है।
दो अलग-अलग वार्ड, लेकिन एस्टीमेट एक जैसे! आखिर किस आधार पर तैयार हुआ प्रस्ताव?
शिकायतकर्ता देवेश कौशिक ने सबसे बड़ा सवाल दोनों वार्डों के एस्टीमेट में समानता को लेकर उठाया है। शिकायत के मुताबिक, कैट आई सोलर, थर्मोप्लास्टिक रोड लाइन, फैंसी फोकस लाइट, गमले रखने, सीएनसी कटिंग शीट से सौंदर्यीकरण के साथ सड़क, नाली, चैनल और पुलिया मरम्मत जैसे कार्य दोनों वार्डों के एस्टीमेट में शामिल किए गए हैं।
देवेश कौशिक का आरोप है कि अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और जरूरतों वाले वार्डों में लगभग समान कार्ययोजना तैयार होना गंभीर संदेह पैदा करता है। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या वास्तव में दोनों वार्डों की जरूरतों का अलग-अलग सर्वे किया गया था या फिर एक ही तरह के एस्टीमेट तैयार कराकर सरकारी धन खर्च करने की योजना बनाई गई?
**निर्माण विभाग के अवर अभियंता ने कैसे तैयार किए पथ प्रकाश के एस्टीमेट?**
शिकायत में एक और गंभीर मुद्दा उठाया गया है। देवेश कौशिक के अनुसार, एस्टीमेट तैयार करने वाले अवर अभियंता को निर्माण विभाग के कार्यों का अनुभव है, जबकि प्रस्तावों में पथ प्रकाश से जुड़े कार्य भी शामिल हैं। उनका आरोप है कि पथ प्रकाश विभाग के संबंधित अवर अभियंता से एस्टीमेट तैयार नहीं कराया गया। इस प्रक्रिया को लेकर भी उन्होंने जांच की मांग की है।
**बोर्ड बैठक में पास हुए प्रस्ताव, अब निविदा प्रक्रिया पर उठे सवाल**
शिकायत के अनुसार, 18 जुलाई 2026 को आयोजित नगर पालिका बोर्ड बैठक में प्रस्ताव संख्या 1112 की क्रम संख्या 69 और 109 के अंतर्गत इन कार्यों को स्वीकृति दी गई थी। अब इन प्रस्तावों के आधार पर निविदा प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। ऐसे में शिकायतकर्ता ने निविदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
अप्रैल 2024 से अब तक के निर्माण और भुगतान भी जांच के दायरे में लाने की मांग
भाजपा सभासद देवेश कौशिक ने केवल मौजूदा एस्टीमेट ही नहीं, बल्कि वार्ड-25 और वार्ड-49 में अप्रैल 2024 के बाद निर्माण, जलकल और पथ प्रकाश विभाग के माध्यम से कराए गए सभी कार्यों तथा उनके भुगतान का भी रिकॉर्ड खंगालने की मांग की है। उनका कहना है कि उच्चाधिकारियों की निगरानी में जांच होने पर ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
अधिकारियों से दो टूक मांग: जांच होने तक निविदाएं और भुगतान रोके जाएं
देवेश कौशिक ने अधिशासी अधिकारी से मांग की है कि दोनों वार्डों की प्रस्तावित निविदाओं को तत्काल निरस्त किया जाए अथवा जांच पूरी होने तक उनकी प्रक्रिया रोकी जाए। साथ ही दोनों वार्डों से संबंधित सभी प्रकार के भुगतानों पर रोक लगाकर निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
इस शिकायत की प्रतिलिपि सहारनपुर मंडलायुक्त, जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर और नगर पालिका अध्यक्षा को भी भेजी गई है।
**अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अलग-अलग वार्डों में एक जैसे एस्टीमेट तैयार कराने के पीछे क्या आधार था? क्या दोनों वार्डों के प्रस्तावों और संबंधित सभासदों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होगी? क्या नगर पालिका प्रशासन निविदाओं और भुगतानों पर रोक लगाएगा?**
भाजपा सभासद देवेश कौशिक की इस शिकायत के बाद नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अब निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई और जांच के परिणाम पर टिकी हैं।
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