Manikarnika Ghat पर चल रहे विकास को लेकर बड़ा विवाद, अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़ने का लगा आरोप, Modi पर भड़की Congress
Manikarnika Ghat पर चल रहे विकास को लेकर बड़ा विवाद, अहिल्याबाई होलकर की मूर्ति तोड़ने का लगा आरोप, Modi पर भड़की Congress

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में स्थित मणिकर्णिका घाट इन दिनों पुनरुद्धार और पुनर्विकास कार्य को लेकर विवाद के केंद्र में है। घाट पर चल रहे निर्माण और अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान देवी अहिल्याबाई होलकर की लगभग सौ वर्ष पुरानी मूर्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोपों ने स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक हलचल मचा दी है। प्रशासन जहां इसे गलतफहमी बता रहा है, वहीं विभिन्न सामाजिक और धार्मिक संगठनों के साथ साथ राजनीतिक दलों ने इसे विरासत और आस्था पर हमला करार दिया है।
वाराणसी में विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व पाल समाज समिति के सदस्यों ने करते हुए आरोप लगाया है कि पुनरुद्धार के नाम पर बिना किसी पूर्व सूचना के मणिकर्णिका घाट के मूल स्वरूप से छेड़छाड़ की जा रही है और इसी क्रम में देवी अहिल्याबाई होलकर की ऐतिहासिक मूर्ति को हटा दिया गया या क्षतिग्रस्त किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह मूर्ति केवल पत्थर की प्रतिमा नहीं बल्कि समुदाय की आस्था और इतिहास का प्रतीक है।
प्रदर्शन को मराठी समुदाय के कुछ वर्गों, धनगर समाज और अन्य स्थानीय समूहों का भी समर्थन मिला। सनातन रक्षक दल के अध्यक्ष अजय शर्मा ने आरोप लगाया कि घाट पर कई प्रतिष्ठित और प्राण प्रतिष्ठित मूर्तियों को मशीनों से तोड़ा गया। उन्होंने कहा कि जिन प्रतिमाओं में प्राण प्रतिष्ठा की जाती है, उन्हें जीवित माना जाता है और इस तरह का ध्वस्तीकरण धार्मिक भावनाओं का सीधा अपमान है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि मूर्तियों को बाद में दोबारा स्थापित भी किया जाएगा तो उनकी धार्मिक शुचिता कैसे बनी रहेगी।
वहीं दूसरी ओर, प्रशासन ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि मणिकर्णिका घाट पर चल रहे कार्यों का उद्देश्य केवल सुविधाओं में सुधार, स्वच्छता और स्थान प्रबंधन को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि निर्माण के दौरान जो भी कलाकृतियां या मूर्तियां प्रभावित हुई हैं, उन्हें संस्कृति विभाग द्वारा सुरक्षित स्थान पर रखा गया है और कार्य पूर्ण होने के बाद उन्हें उनके मूल रूप में पुनः स्थापित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी मंदिर को न तो तोड़ा गया है और न ही जानबूझकर नुकसान पहुंचाया गया है।
हम आपको यह भी बता दें कि मौके पर पहुंचे उपजिलाधिकारी आलोक वर्मा ने कहा है कि घाट और उसके आसपास रहने वाले अधिकांश लोग विरोध नहीं कर रहे हैं और विरोध प्रदर्शनों में कुछ बाहरी तत्वों के शामिल होने की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि प्रशासन और पुलिस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
दूसरी ओर, इस विवाद ने केवल वाराणसी तक ही सीमित न रहकर मध्य प्रदेश के इंदौर में भी तीखी प्रतिक्रिया पैदा की है, जहां अहिल्याबाई होलकर की विरासत को गहरी श्रद्धा से देखा जाता है। इंदौर में नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने दावा किया कि मणिकर्णिका घाट पर अहिल्याबाई द्वारा निर्मित या पुनर्स्थापित प्राचीन मंदिरों और प्रतिमाओं को नुकसान पहुंचा है। होलकर वंश के वंशज यशवंतराव होलकर भी वाराणसी पहुंचे और पूरे मामले की जांच तथा पूर्ण पुनर्स्थापना की मांग की।
वहीं, राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधा हमला करते हुए आरोप लगाया कि सौंदर्यीकरण और व्यावसायीकरण के नाम पर सदियों पुरानी धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को मिटाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट का उल्लेख गुप्त काल से मिलता है और बाद में अहिल्याबाई होलकर ने इसका पुनरुद्धार कराया था, ऐसे में इसे तोड़ना काशी की आत्मा पर आघात है। मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि पहले गलियारे के नाम पर छोटे-बड़े मंदिर और देवालय तोड़े गए और अब प्राचीन घाटों की बारी है। उन्होंने कहा कि दुनिया का प्राचीनतम शहर काशी अध्यात्म, संस्कृति, शिक्षा और इतिहास का ऐसा संगम है जो पुरी दुनिया को अपनी ओर आकर्षित करता है। खरगे ने कहा, ‘‘क्या इस सब के पीछे फिर से व्यावसायिक मित्रों को फायदा पहुंचाने की मंशा है? जल, जंगल, पहाड़- सब आपने उनके हवाले किए हैं, अब सांस्कृतिक विरासत की बारी आ गई है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश की जनता के आपसे दो सवाल हैं- 1. क्या जीर्णोद्धार, साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का काम विरासत को सहेज नहीं हो सकता था? पूरे देश को याद है कि संसद परिसर से आपकी सरकार ने किस तरह से महात्मा गांधी एवं बाबासाहेब आंबेडकर समेत भारत की महान हस्तियों की प्रतिमाओं को बिना किसी विचार-विमर्श के एक कोने में रखवा दिया था।’’ उन्होंने आरोप लगाया कि जलियांवाला बाग स्मारक की दीवारों से इतिहास से हमारे स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानियों को इसी पुनरुद्धार के नाम पर मिटाया गया। खरगे ने दूसरा सवाल करते हुए कहा, ‘‘मणिकर्णिका घाट में बुलडोजर का शिकार बनी सैंकड़ों साल पुरानी मूर्तियों पर कुल्हाड़ी चलाकर उन्हें मलबे में क्यों डाला गया, क्या उन्हें किसी संग्रहालय में संभाल कर नहीं रखा जा सकता था? उन्होंने कहा, ‘‘आपने दावा किया था- ‘मां गंगा ने बुलाया है।’ आज आपने मां गंगा को भुला दिया है। बनारस के घाट बनारस की पहचान हैं। क्या आप इन घाटों को जनता की पहुंच से दूर करना चाहते हैं?’’ उन्होंने कहा कि लाखों लोग मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में हर वर्ष काशी आते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘क्या आपकी मंशा इन श्रद्धालुओं से विश्वासघात करने की है?” कांग्रेस के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष अजय राय ने भी इसे सनातन संस्कृति पर हमला बताया है।
उधर, भाजपा सूत्रों के अनुसार, यह मामला प्रधानमंत्री कार्यालय और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय तक पहुंच चुका है। प्रशासन की ओर से भरोसा दिलाया गया है कि पुनर्विकास के साथ साथ विरासत का संरक्षण भी प्राथमिकता रहेगी और सभी मूर्तियों तथा कलाकृतियों को सम्मानपूर्वक पुनः स्थापित किया जाएगा।
हम आपको बता दें कि मणिकर्णिका घाट हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन और पवित्र श्मशान स्थलों में से एक है और मान्यता है कि यहां अंतिम संस्कार से मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का निर्माण या बदलाव अत्यंत संवेदनशील विषय बन जाता है। देखा जाये तो वर्तमान विवाद ने एक बार फिर यह प्रश्न खड़ा कर दिया है कि विकास और विरासत के बीच संतुलन कैसे साधा जाए, ताकि आधुनिक सुविधाओं के साथ साथ आस्था, इतिहास और संस्कृति भी सुरक्षित रह सके।

