सहारनपुर, 5 सितंबर। कलेक्ट्रेट परिसर स्थित मस्जिद के ध्वस्तीकरण मामले में अब पुराने राजस्व अभिलेखों को लेकर नया विवाद सामने आया है। भारतीय अधिवक्ता सुरक्षा एवं अधिकार परिषद के राष्ट्रीय सचिव एडवोकेट साजिद मलिक ने SSP सहारनपुर को पत्र भेजकर खसरा नंबर 539 से संबंधित पुराने राजस्व रिकॉर्ड सार्वजनिक करने की मांग की है।
पत्र में मस्जिद की भूमि को सरकारी भूमि बताए जाने और नगर मजिस्ट्रेट न्यायालय के 16 जुलाई 2026 के आदेश के अनुपालन में हुई ध्वस्तीकरण कार्रवाई का उल्लेख करते हुए भूमि की ऐतिहासिक और कानूनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की गई है।
एडवोकेट साजिद मलिक ने खसरा, खतौनी, नक्शा तथा 1359 फसली से 1427 फसली तक के प्रमाणित राजस्व अभिलेख सार्वजनिक करने की मांग की है। साथ ही यह भी पूछा गया है कि मस्जिद का निर्माण किस वर्ष हुआ, निर्माण के समय भूमि किसके नाम दर्ज थी और राजस्व रिकॉर्ड में उसकी प्रकृति क्या दर्ज थी।
पत्र में भूमि के स्वामित्व और कब्जे में हुए बदलावों का रिकॉर्ड तथा मस्जिद को अवैध या अतिक्रमण मानने के आधार में इस्तेमाल किए गए दस्तावेज भी सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
मामले में जिला जज कोर्ट, सहारनपुर में प्रकीर्ण अपील संख्या 108/2026 का भी उल्लेख सामने आया है। इसमें संबंधित पक्ष की ओर से वक्फ संख्या 451 और Places of Worship Act का हवाला दिए जाने की बात कही गई है। इन कानूनी प्रावधानों की अंतिम व्याख्या न्यायालय के निर्णय का विषय है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन पुराने राजस्व अभिलेख सार्वजनिक करता है या नहीं। इन दस्तावेजों से खसरा नंबर 539 की ऐतिहासिक स्थिति, भूमि के स्वामित्व और उसकी प्रकृति से जुड़े कई सवालों पर स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
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