[aioseo_breadcrumbs]

Sajad Lone ने Kashmir को Jammu से अलग करने की माँग की, बोले- Amicable Divorce हो जाना चाहिए

Share This Article

पीपुल्स कांफ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन ने जम्मू और कश्मीर संभागों के बीच मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था पर पुनर्विचार की खुली मांग कर एक नई बहस छेड़ दी है। हम आपको बता दें कि सज्जाद लोन घाटी से पहले प्रमुख नेता हैं जिन्होंने दोनों क्षेत्रों के बीच “अमिकल डिवोर्स” यानी सौहार्दपूर्ण अलगाव की बात कही है। एक आधिकारिक बयान में सज्जाद लोन ने कहा है कि विकास से जुड़े विवादों के साथ-साथ राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों ने हालात को इस मोड़ पर ला खड़ा किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जम्मू को “कश्मीर को पीटने वाली लाठी” की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। लोन ने कहा है कि कश्मीर के लोग अब और बर्दाश्त नहीं कर पा रहे हैं और अलगाव की भावना पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो गई है।

हम आपको बता दें कि सज्जाद लोन का यह बयान ऐसे समय में आया है जब जम्मू के कुछ वर्गों ने केंद्रीय कश्मीर के बड़गाम जिले में प्रस्तावित राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय (नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी) को जम्मू स्थानांतरित करने की मांग की है। इसके साथ ही जम्मू के लिए अलग राज्य की आवाजें भी फिर से तेज हुई हैं। सज्जाद लोन ने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से अपील की है कि वह अपने चुनावी वादे के अनुरूप बड़गाम में ही लॉ यूनिवर्सिटी की स्थापना सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री कार्यालय की विश्वसनीयता जनता से किए गए वादों को निभाने पर निर्भर करती है।

हंदवाड़ा से विधायक सज्जाद लोन ने जम्मू में कश्मीर-केंद्रित परियोजनाओं के विरोध को “आदतन रवैया” भी करार दिया। उन्होंने सवाल उठाया, “जब जम्मू में पहले से IIM है, तो कश्मीर में लॉ यूनिवर्सिटी बनने पर आपत्ति क्यों?” उन्होंने इस विरोध को “लुनैसी” बताया।

 

वहीं, अलग जम्मू राज्य की मांग को लेकर भाजपा के वरिष्ठ नेता जुगल किशोर शर्मा ने स्पष्ट कहा कि पार्टी के भीतर किसी भी स्तर पर अलग जम्मू राज्य को लेकर कोई चर्चा नहीं है। जुगल किशोर शर्मा ने दोहराया कि भाजपा की स्पष्ट और स्थायी नीति पूरे जम्मू-कश्मीर के लिए राज्य का दर्जा बहाल करने की है, जैसा कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री द्वारा आश्वासन दिया गया है। उन्होंने कहा कि अलग राज्य को लेकर फैलाए जा रहे दावे भ्रामक हैं और जनता में भ्रम पैदा करने के लिए किए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पार्टी का फोकस शांति, विकास, राजनीतिक स्थिरता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने पर है तथा राज्य का दर्जा संसद में दिए गए आश्वासनों के अनुरूप उचित समय पर बहाल किया जाएगा। हम आपको बता दें कि जम्मू को अलग करने की मांग तब उठी जब हाल ही में भाजपा विधायक श्याम लाल शर्मा ने कथित भेदभाव का हवाला देते हुए जम्मू के अलगाव की मांग उठाई थी।

 

उधर, देखा जाये तो जम्मू–कश्मीर की राजनीति में सज्जाद लोन द्वारा उठाई गई “अमिकल डिवोर्स” की मांग इसलिए अहम है क्योंकि यह कश्मीर घाटी से आने वाले किसी वरिष्ठ नेता द्वारा पहली बार इतने स्पष्ट शब्दों में की गई है। चिंताजनक पहलू यह है कि अलगाव की भाषा मुख्यधारा के विमर्श में प्रवेश कर रही है। “अमिकल डिवोर्स” जैसी शब्दावली दरअसल चेतावनी है। हालांकि जरूरत किसी नए विभाजन की नहीं, बल्कि ईमानदार संवाद, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और समान विकास की है। जम्मू और कश्मीर की विविधता को प्रतिस्पर्धा नहीं, पूरकता के रूप में देखने की राजनीतिक परिपक्वता ही इस संकट का स्थायी समाधान हो सकती है। वरना अलगाव की यह बहस, चाहे वह कितनी भी “सौहार्दपूर्ण” क्यों न कही जाए, अंततः पूरे क्षेत्र की स्थिरता के लिए घातक सिद्ध हो सकती है।

 

 

Gold and Silver price

मौसम की जानकारी

Advertisement

Gold and Silver price

मौसम की जानकारी

Live Poll

[democracy id="1"]

Also Read This