
अमरदीप वर्मा —
समालखा, 24 अक्टूबर – हरियाणा के समालखा स्थित निरंकारी आध्यात्मिक स्थल पर चार दिवसीय 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का शुभारंभ प्रेम, भक्ति और मानव एकता के संदेश के साथ हुआ। देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं ने समागम में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने अपने प्रवचनों में कहा कि ब्रह्मज्ञान जागृति का अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि इसकी शुरुआत है। सच्ची आध्यात्मिक जागृति तभी है, जब मनुष्य जीवन के प्रत्येक क्षण में परमात्मा का एहसास करते हुए प्रेम, विश्वास और विनम्रता के साथ जीवन जिए। सत्संग में शामिल होना तभी सार्थक है, जब वहां से प्राप्त शिक्षाओं को व्यवहार में उतारा जाए।
उन्होंने कहा कि सेवा और समर्पण दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चे भाव से होने चाहिए। दूसरों के प्रति प्रेम रखना, निंदा और अहंकार से बचना तथा अपनी वाणी और कर्मों से अच्छाई प्रकट करना ही वास्तविक आध्यात्मिकता है। परमात्मा से प्राप्त साधनों का उपयोग मानवता की सेवा और परोपकार में करना चाहिए।
**सेवादल रैली में दिखा अनुशासन और सेवा का भाव**
समागम के दूसरे दिन भव्य सेवादल रैली आयोजित की गई, जिसमें देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से आए हजारों सेवादल स्वयंसेवकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शारीरिक व्यायाम, खेलकूद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और मिशन की शिक्षाओं पर आधारित लघु नाटिकाओं के माध्यम से अनुशासन, सहयोग और निःस्वार्थ सेवा का संदेश दिया गया।
इस अवसर पर सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि सेवा केवल किसी जिम्मेदारी को निभाने तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन का अभिन्न अंग है। सच्चा सेवादार वही है, जो परमात्मा में विश्वास रखते हुए हर परिस्थिति में मानवता के कल्याण के लिए तत्पर रहे। उन्होंने सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने तथा तन, मन और धन को परोपकार में लगाने की प्रेरणा दी।
इससे पूर्व सतगुरु माता जी ने शांति और एकता के प्रतीक मिशन के श्वेत ध्वज का ध्वजारोहण किया। संत निरंकारी सेवादल के मुख्य संचालक एस.के. जुनेजा ने विश्वभर से आए स्वयंसेवकों की ओर से सतगुरु माता जी के प्रति श्रद्धा व्यक्त की।
समागम में विभिन्न संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों से आए श्रद्धालुओं का संगम प्रेम, सद्भावना और मानव एकता का संदेश देता नजर आया।
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