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व्हीलचेयर पर पहुंचे, अपने पैरों पर लौटे इमरान! – मैक्स हॉस्पिटल नोएडा के डॉ. दिनेश रत्तनानी ने जटिल स्पाइनल ट्यूमर की सर्जरी कर बदली जिंदगी

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अमरदीप वर्मा – मुजफ्फरनगर निवासी 40 वर्षीय इमरान के लिए रीढ़ की हड्डी में मौजूद जटिल ट्यूमर उनकी जिंदगी को मुश्किल बना रहा था। कमर के निचले हिस्से में लगातार दर्द, बाएं पैर में कमजोरी और चलने-फिरने में परेशानी के कारण उन्हें सहारे की जरूरत पड़ रही थी। पहले एक अन्य अस्पताल में ऑपरेशन के बावजूद ट्यूमर पूरी तरह नहीं निकल सका और पैर की ताकत में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इसके बाद इमरान व्हीलचेयर पर मैक्स सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, नोएडा पहुंचे, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर उन्हें दोबारा चलने में सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण सफलता हासिल की।

 

मैक्स हॉस्पिटल के न्यूरोसर्जरी एवं न्यूरो स्पाइन विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. दिनेश रत्तनानी के नेतृत्व में की गई सर्जरी के दौरान रीढ़ की हड्डी के D12-L1 स्तर पर मौजूद लगभग 3×3 सेंटीमीटर के इंट्राड्यूरल एक्स्ट्रामेडुलरी स्पाइनल ट्यूमर को लगभग पूरी तरह निकाल दिया गया। यह ट्यूमर रीढ़ की सुरक्षात्मक झिल्ली के भीतर स्थित था और पैरों की गतिविधियों तथा संवेदना को नियंत्रित करने वाली नसों पर दबाव डाल रहा था।

 

सर्जरी के दौरान नसों को सुरक्षित रखने के लिए आधुनिक न्यूरो नर्व मॉनिटरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही ड्यूरा की सुरक्षित क्लोजर प्रक्रिया के लिए ड्यूराजेन और टिसील ग्लू का उपयोग किया गया, ताकि सर्जरी से जुड़ी संभावित जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सके।

 

सर्जरी के बाद पैर की ताकत में सुधार, पांचवें दिन मिली छुट्टी

 

ऑपरेशन के बाद इमरान के बाएं पैर की मांसपेशियों की ताकत में सुधार हुआ और चलने की क्षमता बेहतर होने लगी। हालांकि, पैर में कुछ सुन्नपन बना रहा, लेकिन उनकी रिकवरी संतोषजनक रही। सर्जरी के पांचवें दिन उन्हें स्थिर हालत में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। उपचार के लगभग दो महीने बाद इमरान दोबारा स्वतंत्र रूप से चलने लगे और उनकी चलने-फिरने की क्षमता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला।

 

 

 

 

डॉ. दिनेश रत्तनानी ने बताया कि रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर होने पर लगातार कमर दर्द, पैरों में कमजोरी, संवेदना में बदलाव और चलने में परेशानी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं। खासकर जब कमजोरी लगातार बढ़ रही हो या चलने-फिरने में कठिनाई होने लगे, तो इसे सामान्य कमर दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। समय पर जांच और विशेषज्ञ से परामर्श जरूरी है।

 

 

 

 

उन्होंने कहा कि स्पाइनल ट्यूमर की सर्जरी में नसों पर पड़ रहे दबाव को दूर करने के साथ आसपास की महत्वपूर्ण नसों को सुरक्षित रखना भी बेहद जरूरी होता है। सर्जरी के बाद बेहतर रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी, रिहैबिलिटेशन और नियमित फॉलो-अप की भी अहम भूमिका होती है।

 

 

 

 

यह मामला दर्शाता है कि लगातार कमर दर्द के साथ पैरों में कमजोरी, सुन्नपन या चलने में परेशानी होने पर समय रहते विशेषज्ञ से जांच कराना कितना महत्वपूर्ण है।

 

इस दौरान सजकता के तौर पर पूछे गए प्रश्न कि व्यक्ति किस तरह से इस और ध्यान दे कि इस तरह की बीमारी से बचा जा सके या समय रहते इलाज कराया जा सके इसका उत्तर देते हुए डा. दिनेश रत्तनानी ने बताया कि सभी व्यक्ति यदि इस तरह ki रीड की हड्डी में कोई परेशानी या दर्द महसूस करता है तो समय रहते डॉक्टर को दिखाएं ताकि समय पर इलाज किया जा सके वहीं उन्होंने कहा कि आज की जीवन शैली में लोग मोबाइल में ज्यादा व्यस्त रहने लगे हैं जिसके कारण सर्वाइकल दर्द बना रहना एक कारण है , इसलिए नीचे गर्दन करते हुए मोबाइल को कमस कम इस्तेमाल करें तो काफी हद तक व्यक्ति को इस तरहक समस्या नहीं होगी और वह स्वस्थ रहेगा

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