मुजफ्फरनगर – एस.डी. कॉलेज ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से ‘विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियाँ’ विषय पर जागरूकता गतिविधि का आयोजन किया गया। आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) के अंतर्गत इन्फोटेनमेंट क्लब द्वारा आयोजित कार्यक्रम में शैक्षणिक दबाव, परीक्षा की चिंता, करियर की अनिश्चितता, तनाव और भावनात्मक संतुलन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम का शुभारंभ महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल एवं बीबीए विभागाध्यक्ष राजीव पाल सिंह ने किया।
मानसिक स्वास्थ्य भी विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आधार
प्राचार्य डॉ. संदीप मित्तल ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए शारीरिक स्वास्थ्य के साथ मानसिक स्वास्थ्य भी बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में विद्यार्थियों को पढ़ाई, परीक्षा, करियर निर्माण, पारिवारिक अपेक्षाओं और सामाजिक दबाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में अपनी भावनाओं को समझना, मानसिक रूप से स्वस्थ रहना और कठिन परिस्थितियों का सकारात्मक तरीके से सामना करना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक हासिल करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को आत्मविश्वासी, जिम्मेदार और भावनात्मक रूप से सशक्त नागरिक बनाना भी है। विद्यार्थियों को दूसरों से अपनी तुलना करने के बजाय अपनी क्षमताओं और प्रगति पर ध्यान देना चाहिए। असफलताओं को जीवन का हिस्सा मानकर उनसे सीखने और जरूरत पड़ने पर शिक्षकों एवं अभिभावकों से सहयोग लेने के लिए भी प्रेरित किया।
परीक्षा का दबाव और सोशल मीडिया पर तुलना बढ़ा सकती है तनाव
कार्यक्रम के मुख्य समन्वयक एवं बीबीए विभागाध्यक्ष राजीव पाल सिंह ने पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मानसिक स्वास्थ्य व्यक्ति के विचारों, भावनाओं, व्यवहार, निर्णय लेने की क्षमता और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने का दबाव, भविष्य में रोजगार को लेकर अनिश्चितता, समय प्रबंधन की कठिनाइयाँ, पारिवारिक अपेक्षाएँ और मित्रों के बीच बेहतर साबित होने की प्रतिस्पर्धा विद्यार्थियों में तनाव का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर दूसरों के जीवन से अपनी तुलना करना, पर्याप्त नींद नहीं लेना और अनियमित दिनचर्या भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि कभी-कभी तनाव महसूस करना सामान्य है, लेकिन यदि चिंता, उदासी या निराशा लंबे समय तक बनी रहे और पढ़ाई, दैनिक जीवन अथवा सामाजिक संबंधों पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में किसी विश्वसनीय व्यक्ति, शिक्षक, अभिभावक या प्रशिक्षित मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सहायता लेना जरूरी है।
योग, पर्याप्त नींद और समय प्रबंधन से तनाव पर नियंत्रण का संदेश
राजीव पाल सिंह ने विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य बेहतर बनाए रखने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाने, पर्याप्त नींद लेने, संतुलित आहार ग्रहण करने और शारीरिक गतिविधियों में भाग लेने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि पढ़ाई के दौरान छोटे-छोटे विश्राम लेना, समय का उचित प्रबंधन करना और छोटे एवं स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करना अनावश्यक तनाव को कम करने में सहायक हो सकता है।
उन्होंने ध्यान, योग, गहरी सांस लेने के अभ्यास और रचनात्मक गतिविधियों को भी दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। संगीत सुनना, खेलकूद में भाग लेना, पुस्तकें पढ़ना, प्रकृति के साथ समय बिताना तथा परिवार और मित्रों से बातचीत करना मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है।
विद्यार्थियों को एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान करने की सीख
कार्यक्रम में विद्यार्थियों के बीच आपसी सहयोग, संवेदनशीलता और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया गया। राजीव पाल सिंह ने कहा कि किसी विद्यार्थी की परेशानी का मजाक उड़ाने या उसे कमजोर समझने के बजाय उसकी बात समझने और सहयोग देने का प्रयास करना चाहिए।
उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गलत धारणाओं को दूर करने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि तनाव और चिंता का सामना कर रहे व्यक्ति को आलोचना नहीं, बल्कि समझ, सहयोग और उचित मार्गदर्शन की जरूरत होती है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करना कमजोरी नहीं, बल्कि समस्या को समझने और समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने का सकारात्मक प्रयास है।
पावरपॉइंट प्रस्तुति के माध्यम से आयोजित इस गतिविधि में विद्यार्थियों को मानसिक स्वास्थ्य की चुनौतियों, उनके संभावित कारणों और उनसे निपटने के व्यावहारिक उपायों की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को अपने शैक्षणिक एवं व्यक्तिगत जीवन के बीच संतुलन बनाए रखने और जरूरत पड़ने पर उचित सहायता लेने के लिए प्रेरित करना रहा।
इस अवसर पर बीबीए विभाग के शिक्षक डॉ. संगीता गुप्ता, मोहम्मद अंजार, संजय शर्मा, दीपक गर्ग, सोनिका, पूर्वी, प्राची, रोहन त्यागी, प्रशांत गुप्ता, विनीता चौधरी, सतीश, अमित, पवन बलियान एवं लवी वर्मा उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण के निर्माण में ऐसी जागरूकता गतिविधियों को उपयोगी बताया।
डॉ. आलोक गुप्ता
मीडिया प्रभारी


