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किसी भी देश से नहीं लाया जा सकेगा वापस, कूनो नेशनल पार्क में सोनचिरैया, काला हिरण जैसे इन जानवरों को बचाना जरूरी

किसी भी देश से नहीं लाया जा सकेगा वापस, कूनो नेशनल पार्क में सोनचिरैया, काला हिरण जैसे इन जानवरों को बचाना जरूरी


असीम और प्राचीन, निर्मम और पथरीलें भू-दृश्य की आगोश में समाया। प्रकृति की कोमल छटा में बसा किला। संघर्ष और बलिदान के किस्से सुनाने को बेकरार है। किस्से उस जंगल के जिसे जानवरों का स्वर्ग कहा जाता है। विंध्याचल की शान कूनो जहां 17 सितंबर को नामीबिया से लाए गए चीतों को प्रधानमंत्री ने मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क के बाड़े में खुद अपने हाथों से छोड़ा। देश में करीब 70 सालों के बाद चीतों के दिखने पर लोग काफी उत्साहित हैं। 750 वर्ग किलोमीटर में फैला कूना राष्ट्रीय उद्यान, जिसकी एक झलक दीवाना बना देने वाली है। जंगली जानवरों का घर कूनों भारत से विलुप्त हुए चीतों को वापस लाकर उसकी कमी को पूरा किया गया। लेकिन कूनो नेशनल पार्क में चीते ही नहीं बल्कि तीन ऐसे और जीव हैं जो लुप्त होने की कगार पर हैं। कहा जा रहा है कि अगर ये लुप्त हो गए तो फिर चीता की तरह किसी भी देश से इसे वापस भी नहीं लाया जा सकेगा। ऐसे में आइए जानते हैं कि ये जीव कौन-कौन से हैं।

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चीतों के अलावा और ऐसे जीव जो विलुप्त होने की कगार पर

कूनो नेशनल पार्क में काले हिरण, सोनचिरैया औऱ घोड़ा बर्ड नाम से प्रचलित ग्रेट इंडियन बस्टर्ड और खड़मोर के नाम से पहचाने जाने वाले पक्षी लेसर फ्लोरिकान भी लुफ्त होने की कगार पर है। सोनचिरैया तो पहले ही गंभीर रूप से लुप्तप्राय जीवों की श्रेणी में अपनी जगह बना चुकी है। पूरे भारत में इनकी संख्या 100 के आसपास ही बची होगी। खाड़मोर नाम की पक्षी भी लुप्त होती जा रही है। ये पक्षी गुजरात और मध्य प्रदेश में ही पाए जाते हैं। लेकिन वर्तमान में इनकी संख्या इतनी कम हो चुकी है कि अगर दिख जाए तो आपकी किस्मत है। यहां गौर करने वाली बात ये है कि सोनचिरैया और खड़मोर केवल और केवल भारत में ही पाए जाते हैं। सिर्फ पक्षी ही नहीं काला हिरण भी इसी श्रेणी में है।

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ये प्रजातियां झेल रही हैं अस्तित्व संकट

इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर की रेडलिस्ट के अनुसार पक्षियों की 15 प्रजातियां, स्तवधारियों की 12 प्रजातियां और 18 अन्य प्रजातियां गंभीर रूप से लुप्त प्राय सूची में शामिल हैं। भारत में बंगाल टाइगर, भारतीय शेर, भारतीय गैंडा, गौर, अफ्रीकी लंगूर, तिब्बती हिरन, गंगा नदी की डॉल्फिन, नील गिरी, हिम तेंदुआ, ढोल, काली बत्तख, ग्रेट इंडियन बस्टर, जंगली उल्लू, सफेद पंख वाली बत्तख भारत की विलुप्त प्रजातियां हैं।

कैसे पहचानी जाती हैं लुप्तप्राय प्रजाति

जब प्रजातियों की एक सीमित भौगोलिक सीमा होती है।

50 से कम व्यस्क प्रजाति की बहुत सीमित या छोटी आबादी।

क्या पिछली तीन पीढ़ी या 10 वर्षों के लिए आबादी में 80 % से अधिक की कमी हो।

जीव की आबादी 250 से कम, पिछली एक पीढ़ी या 3 साल के लिए लगातार 25% कम रही हो।

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