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मुजफ्फरनगर में मच्छरों का प्रकोप, चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप और ईओ की कार्यशैली पर उठे सवाल; फॉगिंग को लेकर जवाबदेही कौन लेगा?

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जनहित की आवाज अमरदीप की कलम से

मुजफ्फरनगर। शहर में मच्छरों का प्रकोप बढ़ने और वायरल बीमारियों की शिकायतों के बीच नगर पालिका की फॉगिंग और सफाई व्यवस्था सवालों के घेरे में है। शहर के कई इलाकों में लोगों को मच्छरों की समस्या का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन नियमित फॉगिंग और प्रभावी मच्छर नियंत्रण अभियान को लेकर नगर पालिका की सक्रियता नजर नहीं आ रही है।

सबसे बड़ा सवाल नगर पालिका चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप और अधिशासी अधिकारी की कार्यप्रणाली को लेकर उठ रहा है। आखिर मच्छरों के बढ़ते प्रकोप के बीच फॉगिंग अभियान प्रभावी तरीके से क्यों नहीं चल रहा? क्या नगर पालिका प्रशासन को शहर की जमीनी स्थिति की जानकारी नहीं है या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई में देरी हो रही है?

पिछले वर्ष हुई थी कई बार फॉगिंग

पिछले वर्ष तत्कालीन अधिशासी अधिकारी प्रज्ञा सिंह के निर्देशन में शहर के विभिन्न क्षेत्रों में कई बार फॉगिंग कराए जाने की बात सामने आई थी। इसके विपरीत इस वर्ष मानसून के दौरान और उसके बाद मच्छरों का प्रकोप बढ़ने के बावजूद कई इलाकों में फॉगिंग नहीं दिखाई देने की शिकायतें सामने आ रही हैं।

ऐसे में सवाल यह भी है कि नगर पालिका की फॉगिंग मशीनें कितनी सक्रिय हैं और क्या फॉगिंग के लिए पर्याप्त दवा उपलब्ध है?

बजट का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग

हिंदुस्तान लाइव टुडे नगर पालिका प्रशासन से जानना चाहता है कि मच्छर नियंत्रण और फॉगिंग के लिए कितना बजट उपलब्ध कराया गया है और अब तक इसमें से कितनी धनराशि खर्च की जा चुकी है।

साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए कि अब तक शहर के कितने वार्डों और मोहल्लों में फॉगिंग कराई गई, कितनी बार कराई गई और फॉगिंग में कितनी मात्रा में दवा का इस्तेमाल हुआ।

सफाई व्यवस्था पर भी सवाल

शहर के कई हिस्सों में गंदगी और कूड़े के ढेर होने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। जलभराव और गंदगी वाले स्थान मच्छरों के पनपने का कारण बन सकते हैं। ऐसे में केवल फॉगिंग ही नहीं, बल्कि नियमित सफाई, जलभराव की निकासी और एंटी-लार्वा दवा के छिड़काव की भी आवश्यकता है।

चेयरपर्सन और ईओ से जवाबदेही की मांग

जनता के बीच यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि नगर पालिका की जिम्मेदारी आखिर कौन निभाएगा? चेयरपर्सन मीनाक्षी स्वरूप और अधिशासी अधिकारी को शहर में मच्छर नियंत्रण और सफाई व्यवस्था को लेकर अपनी कार्ययोजना सार्वजनिक करनी चाहिए।

क्या शहर में नियमित फॉगिंग हो रही है?
कितनी फॉगिंग मशीनें चालू हालत में हैं?
कितना बजट आया और कितना खर्च हुआ?
कितनी दवा खरीदी गई और कितना स्टॉक बचा है?
किन-किन वार्डों में फॉगिंग कराई गई?

इन सवालों का जवाब नगर पालिका प्रशासन को जनता के सामने रखना चाहिए।

डीएम से स्थलीय जांच की मांग

हिंदुस्तान लाइव टुडे डिजिटल न्यूज़ चैनल जिलाधिकारी मुजफ्फरनगर से मांग करता है कि शहर की फॉगिंग और सफाई व्यवस्था का स्थलीय निरीक्षण कराकर वास्तविक स्थिति की जांच कराई जाए। साथ ही नगर पालिका से फॉगिंग बजट, दवा की खरीद और खर्च का विवरण तलब कर जनता के सामने स्थिति स्पष्ट कराई जाए।

इस जनहित के मुद्दे को X सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से नगर विकास विभाग और संबंधित अधिकारियों के संज्ञान में भी लाया जाएगा।

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