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डॉ. श्वेता कौशिक ( जिला उपाध्यक्ष भाजपा, मुजफ्फरनगर ) ने डॉक्टरों के स्वास्थ्य और मानसिक तनाव को लेकर भाजपा के राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को ज्ञापन सौंप हुए ते अधिकतम 12 घंटे की ड्यूटी निर्धारित करने की मांग उठाई।

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मेडिकल कॉलेजों में पोस्ट ग्रेजुएशन (पीजी) और सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई कर रहे डॉक्टरों की सेहत, मानसिक तनाव और लगातार लंबी ड्यूटी के मुद्दे पर भाजपा की जिला उपाध्यक्ष डॉ. श्वेता कौशिक ने गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठक श्री नागेंद्र जी को ज्ञापन सौंपकर डॉक्टरों के ड्यूटी समय को निर्धारित करने तथा अधिकतम 12 घंटे की ड्यूटी की व्यवस्था लागू करने की मांग उठाई है। डॉ. श्वेता कौशिक ने कहा कि डॉक्टरों पर काम का अत्यधिक दबाव उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में चिकित्सा शिक्षा और अस्पतालों की कार्यप्रणाली में डॉक्टरों के स्वास्थ्य, आराम और मानसिक संतुलन को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

छह महीने में 12 डॉक्टरों की आत्महत्या की खबर ने झकझोरा

डॉ. श्वेता कौशिक ने 26 सितंबर 2026 को लिखे अपने पत्र में बताया कि उन्होंने अमर उजाला समाचार पत्र में छह महीने के भीतर 12 डॉक्टरों द्वारा आत्महत्या किए जाने से संबंधित खबर पढ़ी थी। इस खबर ने उन्हें गहरे स्तर पर विचलित किया। उन्होंने डॉक्टरों की आत्महत्या के पीछे बताए गए संभावित कारणों और विशेष रूप से लगातार 35 से 40 घंटे तक अस्पतालों में ड्यूटी करने की परिस्थितियों पर चिंता जताई।

उन्होंने अपने पत्र में इस बात पर जोर दिया कि डॉक्टर भी इंसान हैं। उनसे मरीजों की सेवा और उपचार के दौरान पूरी एकाग्रता, संवेदनशीलता तथा जिम्मेदारी की अपेक्षा की जाती है। लेकिन यदि किसी डॉक्टर को लगातार कई-कई घंटे काम करना पड़े और पर्याप्त आराम का अवसर न मिले, तो उसके शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्थिति और कार्यक्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसलिए डॉक्टरों के काम के घंटे निर्धारित करना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।

डॉक्टर बनाने के लिए परिवार करता है वर्षों की मेहनत

डॉ. श्वेता कौशिक ने अपने ज्ञापन में डॉक्टरों के पीछे उनके परिवारों के संघर्ष और उम्मीदों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि एक परिवार अपने बच्चे को डॉक्टर बनाने के लिए वर्षों तक मेहनत करता है। माता-पिता अपने बच्चों की शिक्षा पर समय, संसाधन और अपनी अनेक इच्छाओं का त्याग करते हैं। उनकी उम्मीद होती है कि बच्चा डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करेगा, जरूरतमंदों का उपचार करेगा और अपने परिवार का सहारा बनेगा।

ऐसे में जब कोई युवा डॉक्टर अपनी पढ़ाई और प्रशिक्षण के महत्वपूर्ण पड़ाव पर गंभीर मानसिक तनाव से गुजरता है और आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है, तो उस परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है। डॉ. कौशिक ने इसी संवेदनशील पहलू को सामने रखते हुए डॉक्टरों के लिए बेहतर कार्य परिस्थितियां उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।

न्यूनतम 8 और अधिकतम 12 घंटे की ड्यूटी तय करने की मांग

डॉ. श्वेता कौशिक ने भाजपा के राष्ट्रीय संगठक नागेंद्र जी से अनुरोध किया कि मेडिकल कॉलेजों में पीजी और सुपर स्पेशियलिटी की पढ़ाई कर रहे डॉक्टरों के ड्यूटी समय को व्यवस्थित किया जाए। उन्होंने न्यूनतम 8 घंटे और अधिकतम 12 घंटे की ड्यूटी निर्धारित करने का सुझाव दिया, ताकि डॉक्टरों को पर्याप्त आराम मिल सके और वे तनावमुक्त होकर अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर सकें।

उनका कहना है कि डॉक्टरों को बेहतर कार्य वातावरण उपलब्ध कराना केवल उनके व्यक्तिगत स्वास्थ्य का मामला नहीं है, बल्कि इसका संबंध मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता से भी है। शारीरिक रूप से थका हुआ और मानसिक दबाव से गुजर रहा डॉक्टर लंबे समय तक एकाग्रता बनाए रखने में कठिनाई महसूस कर सकता है। इसलिए डॉक्टरों के कार्य समय, विश्राम और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।

चिकित्सा व्यवस्था में डॉक्टरों के स्वास्थ्य को भी मिले प्राथमिकता

डॉ. श्वेता कौशिक की इस पहल ने मेडिकल कॉलेजों में काम करने वाले युवा डॉक्टरों की ड्यूटी और कार्य परिस्थितियों से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे को सामने रखा है। चिकित्सा क्षेत्र में मरीजों की सेवा सर्वोपरि है, लेकिन इस सेवा को बेहतर ढंग से जारी रखने के लिए डॉक्टरों का स्वस्थ रहना भी उतना ही आवश्यक है।

विशेष रूप से पीजी और सुपर स्पेशियलिटी के दौरान डॉक्टरों को चिकित्सा प्रशिक्षण, मरीजों की देखभाल और अस्पताल की जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है। ऐसे में ड्यूटी के घंटे, पर्याप्त विश्राम और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी सहायता की व्यवस्था डॉक्टरों के हित में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

डॉ. श्वेता कौशिक ने अपने पत्र के माध्यम से संबंधित नेतृत्व से इस विषय को गंभीरता से लेने और डॉक्टरों के लिए अधिक मानवीय एवं संतुलित कार्य व्यवस्था सुनिश्चित करने का आग्रह किया है। अब इस मुद्दे पर संबंधित स्तर पर क्या पहल होती है, यह देखने वाली बात होगी।

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