
मुजफ्फरनगर, 28 अक्टूबर 2026 – जनपद में एचआईवी/एड्स संक्रमण की रोकथाम, समय पर जांच, उचित उपचार और परामर्श सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बुधवार को जिला रेडक्रॉस भवन में चिकित्साधिकारियों की एक दिवसीय संवेदीकरण एवं उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यशाला में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और चिकित्सकों को एचआईवी/एड्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं। साथ ही राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य चिकित्साधिकारियों की एचआईवी/एड्स से संबंधित समझ को मजबूत करना तथा संक्रमण की रोकथाम, जांच, उपचार, परामर्श और मरीजों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं को बेहतर बनाना रहा। कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञों ने एचआईवी संक्रमण से बचाव के उपायों, समय पर जांच कराने की आवश्यकता और संक्रमित व्यक्तियों को उचित उपचार सेवाओं से जोड़ने के महत्व पर विस्तार से जानकारी दी।
नाको और उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी के सहयोग से आयोजन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील तेवतिया के निर्देशन तथा जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. अजय प्रताप शाही के मार्गदर्शन में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको), उत्तर प्रदेश राज्य एड्स नियंत्रण सोसाइटी तथा पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया का सहयोग और समन्वय रहा।
कार्यशाला के माध्यम से चिकित्साधिकारियों को राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के उद्देश्यों, दिशा-निर्देशों और स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी गई। अधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में कार्यक्रम की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से लागू करने तथा एचआईवी/एड्स से संबंधित सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया।
एचआईवी संक्रमण की रोकथाम और जांच पर विशेष जोर
कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (एनएसीपी) की संरचना एवं उद्देश्यों के साथ एचआईवी संक्रमण की स्थिति, संक्रमण से बचाव और रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई।
विशेषज्ञों ने बताया कि एचआईवी संक्रमण की समय पर पहचान, उचित परामर्श और उपचार सेवाओं से जुड़ाव महत्वपूर्ण है। चिकित्साधिकारियों को जांच एवं परामर्श सेवाओं को बेहतर बनाने और मरीजों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के संबंध में जानकारी दी गई।
इसके साथ ही एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (एआरटी) से जुड़े विषयों पर भी विस्तार से जानकारी प्रदान की गई। एआरटी एचआईवी संक्रमण को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। निर्धारित चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित उपचार से संक्रमित व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद पा सकते हैं।
एसटीआई/आरटीआई प्रबंधन और उच्च जोखिम वाले समूहों पर चर्चा
कार्यशाला में यौन संचारित संक्रमण (एसटीआई) और प्रजनन तंत्र संक्रमण (आरटीआई) के प्रबंधन से जुड़े विषयों पर भी जानकारी दी गई। चिकित्साधिकारियों को इन संक्रमणों की पहचान, जांच, परामर्श और उपचार से संबंधित आवश्यक पहलुओं से अवगत कराया गया।
इसके अतिरिक्त ईवीटीएचएस तथा उच्च जोखिम वाले समूहों (एचआरजी) से संबंधित विभिन्न विषयों पर प्रस्तुतीकरण किया गया। विशेषज्ञों ने इन समूहों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने, समय पर जांच और उचित परामर्श उपलब्ध कराने तथा एचआईवी संक्रमण की रोकथाम के लिए जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।
समय पर उपचार और मरीजों की देखभाल जरूरी
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि एचआईवी/एड्स से संबंधित स्वास्थ्य सेवाओं में जांच के साथ-साथ परामर्श, उपचार और निरंतर देखभाल का भी महत्वपूर्ण स्थान है। मरीजों को समय पर आवश्यक सेवाओं से जोड़ना और उपचार संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करना कार्यक्रम की प्रभावशीलता बढ़ाने में सहायक है।
चिकित्साधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में उपलब्ध स्वास्थ्य सेवाओं का प्रभावी उपयोग करने तथा एचआईवी/एड्स से संबंधित मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करने के लिए उन्मुख किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य जिला स्तर पर राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के क्रियान्वयन को सुदृढ़ करना और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाना रहा।
विभिन्न स्वास्थ्य इकाइयों के चिकित्साधिकारियों ने किया प्रतिभाग
जिला रेडक्रॉस भवन में आयोजित इस कार्यशाला में जनपद के समस्त अपर एवं उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी, जिला चिकित्सालय के चिकित्साधिकारी, विभिन्न ब्लॉकों के चिकित्सा अधीक्षक, प्रभारी चिकित्सा अधिकारी एवं चिकित्साधिकारी शामिल हुए।
इसके अलावा नगरीय क्षेत्र के चिकित्साधिकारियों, एआरटी नोडल अधिकारी तथा संबंधित चिकित्साधिकारियों ने भी प्रतिभाग किया। कार्यशाला में विशेषज्ञों ने विभिन्न विषयों पर जानकारी साझा करते हुए प्रतिभागियों की समझ को बेहतर बनाने का प्रयास किया।
मास्टर ट्रेनर और विशेषज्ञों ने दी जानकारी
कार्यशाला में मास्टर ट्रेनर डॉ. मनीष शर्मा, राजेश रंजन (सीबीई), अवंतिका बाजपेयी (सीबीओ), अमित चौहान (सीपीएम) तथा दिशा क्लस्टर मुजफ्फरनगर की सीएचओ ममता ने रिसोर्स पर्सन के रूप में प्रतिभाग किया। उन्होंने एचआईवी/एड्स से संबंधित विभिन्न विषयों पर विस्तृत जानकारी देते हुए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत संचालित सेवाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया।
कार्यशाला के समापन पर चिकित्साधिकारियों को अपने-अपने कार्यक्षेत्र में एचआईवी/एड्स की रोकथाम, जांच, उपचार, परामर्श और मरीजों की देखभाल से जुड़ी सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए उन्मुख किया गया। इस पहल का उद्देश्य जनपद में एचआईवी/एड्स नियंत्रण कार्यक्रम को और मजबूत करना तथा लोगों तक बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के प्रयासों को गति देना रहा।
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