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MSP पर भाकियू अराजनैतिक ने सरकार को घेरा, धर्मेंद्र मलिक बोले—लागत और महंगाई का आंकड़ा भी जारी करे सरकार

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मुजफ्फरनगर – गेहूं के समर्थन मूल्य में 25 रुपये की बढ़ोतरी को लेकर भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक ने केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। संगठन के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि सरकार जब फसलों का समर्थन मूल्य घोषित करती है तो उसके साथ किसानों की वास्तविक उत्पादन लागत और बढ़ी महंगाई का प्रमाणिक आंकड़ा भी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

 

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि रबी सीजन 2027-28 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य 25 रुपये बढ़ाकर 2,610 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। उनके अनुसार गेहूं के MSP में यह बढ़ोतरी किसानों की बढ़ती लागत के मुकाबले पर्याप्त नहीं है।

 

उन्होंने कहा कि किसानों को खरपतवारनाशक और कीटनाशक बढ़ी कीमतों पर खरीदने पड़ रहे हैं। डीजल के दाम के साथ-साथ सल्फर और अन्य पोषक तत्वों की कीमतों में भी वृद्धि हुई है। ऐसे में सरकार को केवल MSP की घोषणा करने के बजाय यह भी बताना चाहिए कि फसल उत्पादन की लागत किस आधार पर तय की गई है।

 

‘गेहूं के MSP में 0.96% की वृद्धि किसानों के लिए पर्याप्त नहीं’

 

धर्मेंद्र मलिक ने गेहूं के MSP में हुई 0.96 प्रतिशत की वृद्धि को अपर्याप्त बताते हुए कहा कि किसानों की लागत लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के चलते किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है।

 

भाकियू अराजनैतिक ने MSP की घोषणा में दलहन और तिलहन फसलों के मुकाबले गेहूं में हुई वृद्धि को लेकर भी सवाल उठाए।

 

धर्मेंद्र मलिक के अनुसार मसूर का MSP 7,000 से बढ़ाकर 7,390 रुपये, चने का 5,875 से बढ़ाकर 5,958 रुपये और जौ का 2,150 से बढ़ाकर 2,286 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है। वहीं कुसुम के MSP में 675 रुपये, सरसों और रेपसीड में 413 रुपये तथा मसूर में 390 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई है।

 

लुधियाना और पंतनगर में गेहूं की लागत का आंकड़ा सार्वजनिक करने की मांग

 

भाकियू अराजनैतिक ने सरकार से मांग की है कि फसलों का समर्थन मूल्य घोषित करते समय उत्पादन लागत की प्रमाणिक जानकारी भी सार्वजनिक की जाए।

 

धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि यह भी बताया जाना चाहिए कि कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना और पंतनगर ने गेहूं उत्पादन की कितनी लागत निर्धारित की है। किसानों को यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि किसानों की बढ़ती लागत और महंगाई को देखते हुए MSP से जुड़े सभी आंकड़े पारदर्शी तरीके से सामने आने चाहिए।

 

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