गाजियाबाद जेल के बंदियों ने रचा इतिहास, चार बंदियों ने जीते पुरस्कार
‘आओ सपने बुनें अवार्ड-2026’ में गाजियाबाद जिला कारागार को मिला ‘क्रिएटिव एक्सीलेंस अवार्ड’
गाजियाबाद, 13 सितंबर। जिला कारागार गाजियाबाद में आयोजित ‘आओ सपने बुनें अवार्ड-2026’ कार्यक्रम ने बंदियों की प्रतिभा और रचनात्मकता को जीवंत मंच प्रदान किया। इंडिया विजन फाउंडेशन के तत्वावधान में 12 सितंबर को आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली की 14 जेलों के 167 बंदियों ने पेंटिंग, ड्राइंग, कविता और रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
गाजियाबाद जिला कारागार के चार बंदियों ने सर्वाधिक पुरस्कार हासिल कर अपनी प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। इस उपलब्धि पर जिला कारागार गाजियाबाद को ‘क्रिएटिव एक्सीलेंस अवार्ड’ से सम्मानित किया गया। वहीं जिला कारागार मथुरा को ‘मैक्सिमम एंट्री अवार्ड’ प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एडिशनल पुलिस कमिश्नर, कमिश्नरेट गाजियाबाद केशव कुमार चौधरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। इंडिया विजन फाउंडेशन की डायरेक्टर मोनिका धवन ने बताया कि इस वर्ष पहली बार पेंटिंग, ड्राइंग, कविता और रचनात्मक लेखन को प्रतियोगिता में शामिल किया गया। इसका उद्देश्य बंदियों के भीतर छिपी रचनात्मक प्रतिभा को सामने लाना और उनकी भावनाओं को सकारात्मक दिशा देना है।
गाजियाबाद जिला कारागार के 17 बंदियों ने प्रतियोगिता में प्रतिभाग किया। पेंटिंग में नाब सिंह ने प्रथम, ड्राइंग में नवीन ने प्रथम, कविता में अमरदीप ने प्रथम तथा रचनात्मक लेखन में महिला बंदी पूनम ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया। विजेताओं को मुख्य अतिथि, फाउंडेशन टीम और जेल प्रशासन की ओर से प्रमाण-पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
संगीत ने बांधा समां
कार्यक्रम का भावुक और आकर्षक पक्ष जेल की म्यूजिकल टीम की प्रस्तुति रही। टीम ने ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान सागर में नैया डाल दी’ गीत प्रस्तुत कर माहौल को भावनाओं और संगीत से भर दिया। इसके बाद वाद्य संगीत की प्रस्तुति ने भी उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
मुख्य अतिथि केशव कुमार चौधरी ने गाजियाबाद जिला कारागार को ‘क्रिएटिव एक्सीलेंस अवार्ड’ मिलने और चार बंदियों द्वारा पुरस्कार हासिल करने पर बधाई दी। उन्होंने इंडिया विजन फाउंडेशन के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि पेंटिंग, कविता और लेखन जैसे माध्यम बंदियों की भावनाओं को सकारात्मक दिशा देने का प्रभावी मंच हैं। ऐसे सुधारात्मक प्रयास बंदियों को अपने हुनर को पहचानने और समाज की मुख्यधारा में वापस लौटने के लिए प्रेरित करते हैं।
जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा ने गाजियाबाद जिला कारागार को मिले ‘क्रिएटिव एक्सीलेंस अवार्ड’ को गौरव का क्षण बताया। उन्होंने कहा कि 14 जेलों के बीच गाजियाबाद के चार बंदियों का पुरस्कार हासिल करना उनके मनोबल को बढ़ाएगा और पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
जेल की चारदीवारी केवल सजा का स्थान नहीं, बल्कि सुधार और बदलाव की संभावना का केंद्र भी बन सकती है। किसी बंदी के हाथ में ब्रश, कलम या वाद्य यंत्र पहुंचता है तो वह केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि उसके भीतर छिपी उम्मीद को भी अभिव्यक्ति देता है। ‘आओ सपने बुनें’ जैसे आयोजन इसी उम्मीद को मजबूत करते हैं कि गलती के बाद सुधार संभव है और सुधार के बाद समाज में सम्मान के साथ वापसी भी की जा सकती है।
प्रतिभा को अवसर, सुधार को प्रोत्साहन और समाज की ओर से नई शुरुआत का अवसर—यही सोच जेल सुधार को केवल व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि मानवीय सरोकार का विषय बनाती है।
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